Monday, June 29, 2015

उधार के शब्द


आज ले रही हूँ
तुमसे कुछ
उधार के शब्द
कि तुम्हारे
शब्दों में जादू है
और मुझे
चमत्कार की

जरूरत है!!
- सीमा 

बहाव


कितनी ही नदियों
का बहाव 

होता रहता है
अंदर ही अंदर !


सही दिशा के तलाश में 

ये भटकती रहती हैं !


कितनी बाधाओं को
ये करती

 रहती  है पार
निकलती है
इधर -उधर से
रहती है
बहने को तैयार
अड़चनों से
गुजरते ,गुजरते
नदियाँ नालो में
बदल जाती हैं !!
फिर भी ये
बहती रहती है.!

फिर भी ये
बहती रहती है.!!

-  सीमा 

Friday, June 26, 2015

इशारा



होता है कुछ इशारा
 उस रब का ही, 

कुछ बातें चाह के भी
 पूरी हो नहीं पातीं !

सपनो के शहर के  ,

कुछ सपने ही सच होते ,

हर सपने मे सच होने की

औकात नहीं होती !!

चाहत मन की 
मन  में दबी ही
 है रह जाती ,

किस्मत
 हर चाहत का

साथ नहीं देती !!

- सीमा