Friday, September 19, 2014

        छोटे मोटे
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१

सवालो के  पीछे

सवालो से  ऊपर

कुछ बाते  ऎसी है

जिनका जवाब नही होता

२

खोलता   अतीत के दरवाजे

पसीने से तरबतर चेहरा


३

 हर दिन जख्म

देता  है नया

शुक्र है मैंने

किसी से प्यार

 नही किया

४

दुःख तो नसों मे

बह  रहे खून की तरह

 रहता है छुपकर

ज़रा सी धार लगी नहीं

कि टपक जाता है

 बूँद बूँद बनकर


सीमा श्रीवास्तव







1 comment:

  1. रिश्तों को परिभाषित करती सुन्दर रचना।
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है

    राज चौहान
    http://rajkumarchuhan.blogspot.in

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