Wednesday, July 19, 2017

मैं खुश रहना चाहती हूँ

मै ,
खुश रहना
चाहती हूँ
हर पल

इसलिए
मिलती हूँ
फूलों से ,

खेलती हूँ
हवाओँ  से.

चहकती हूँ
पंछियों के  साथ।

किसी गीत के
बोल गुनगुनाती हूँ ,

दीवानों के
  मन मे डुबकी
लगाती हूँ

और
रंग देती हूँ
शब्दों को
इश्क़ के
रंग में  !!

मै ,
हकीकत की
जमीन को
ठोकर मार के

थोड़ी दूर
ख़वाबों के
साथ उड़
जाती  हूँ

बस इसलिए
कि मै
ख़ुश रहना
चाहती हूँ !!

- सीमा श्रीवास्तव

जो हुआ सो सही ही हुआ

नहीं पता कि जो हुआ
वो कितना सही हुआ
पर जो भी हुआ
वो होता चला गया!

ये नदियाँ जैसे बहती
चली गईं।
ये पौधे जैसे पेड़
होते गए!
कलियाँ जैसे करवट बदल कर
फूल बन गईं!
पत्थर घिस - घिस के
रेत होते रहे
और समन्दर सूख के
भाप से बादल!

हमारे साथ भी कुछ ऐसा ही  हुआ
हाँ, जो हुआ सो सही ही हुआ!

- सीmaa

Sunday, July 16, 2017

संगीत

स्त्रियाँ अपने काजल से
रच लेती है आँखों में
कुछ रंगीन सपने,

हाथों की मेंहदी में
लिख लेती है
गजल और
गुनगुनाती है
जिंदगी की ताल पर
अपनी पसंद का कोई गीत!

अपने ख्वाबों में
झालर लगाकर वो रोज
उन्हें लहराती हैं
और छेड़ती हैं
मन के तारों पर
मधुर संगीत!

-सीmaa

साज़िश

तुम जब साजिशें रच रहे होगें
मैं तितलियों के पंखों के रंग गिन रही हूँगीं!

तुम जब पानी में ज़हर मिला रहे होगे
मैं नदी में अपने  पैर डुबो कर
छप-छपाछप कर रही हूँगीं!

तुम जब  दुनिया के सारे मासूम चेहरों को
मसलने की सोच रहे होगे
मैं अपनी कूचीं उठाकर बना रही हूँगीं
नींद से उठकर आँखें मलता एक बालक!

- सीmaa

Tuesday, July 4, 2017

पेड़

पेड़ के नीचे
बैठ कर देखना
ये उसकी मर्जी है कि
वो तुम्हें फूल देता है,
फल देता है या
सूखे पत्ते
और तुम कोई इच्छा
ना भी रखो तो
उसकी छाँव तले तो रहोगे ही!
-  सीmaa

प्यार

इतना लड़ - झगड़ के भी
क्या पाना चाहता है दिल
बस थोड़ा सा प्यार
और क्या!
- सीmaa

Sunday, July 2, 2017

प्रलय


जब अपने लिए
थोड़ी खुशियाँ बटोरने निकली
तब प्रलय-प्रलय का
हाहाकार हुआ!

लोग जब भिड़े  हुए थे
क्रांति  में
मैंनें बीज बोया था प्रेम का,
शांति का!

जिंदगी की
इतनी लड़ाईयाँ लड़ने के बदले
अगर थोड़ा सा भी प्रेम पा सकूँ तो
प्रलय के बाद रुह भटकेगी नहीं!

ये देह मिट्टी में मिल कर भी
चंदन सी महकेगी तब!

- सीमा श्रीवास्तव

Saturday, July 1, 2017

तू ना सही

तुम ना आओ
तो भी
आती रहेगीं
यादें अनगिनत
तू ना सही
तेरी यादें
वफादार रहीं!
- सीmaa

खाली

जब खत्म हो जाते हैं
बोरियों में कसे अनाज
औरतें सुस्ताना चाहती हैं
पर घर के
खाली डब्बे जब बिना वजन के
गिरने लगते हैं तो
औरतें एक नई लिस्ट बनाती हैं।
भर देती हैं उसमें
पहले से भी ज्यादा जरूरतें
नए-नए साबुन - शैम्पू, तेल।
डब्बे फिर भर जाते हैं
पर मन का एक हिस्सा खाली ही रहता है!
उस खाली जगह को भरने के लिए
उनका थोड़ा खाली रहना जरुरी है!
- सीmaa

चुप्पियाँ

यूँ ही रोज अपनी चुप्पियाँ छोड़ जाते हो तुम
और मैं उससे जिंदगीं के अर्थ निकाला करती हूँ
तुम्हारा होना ना होना मेरे मन की चंचलता है
तुम जो नहीं  कहते वो सुन लेती हूँ मैं
तुमने जो सोचा भी नहीं वो मेरी ख्यालों में होता है
मैं हर बार तुमसे दो कदम आगे रहती हूँ
मैं हर दिन खुद से ज्यादा तुमको जीती हूँ!
- सीmaa