सुबह चिड़िया उठती है
सब की खिड़की पर
ठक - ठक करती,
हाल - चाल लेती,
निश्चिंत करती खुद को
किसी पेड़ की टहनी पर
बैठ जाती है.
आदमी,वृक्ष, धरती
सब सुरक्षित रहें
वह मन ही मन
मनाती है.
बचा रहे प्रेम
भरोसा, उम्मीद
वह मन ही मन
सोचती है!
- सीmaa
Sunday, September 24, 2017
चिड़िया
Sunday, September 10, 2017
तन्हाई
अच्छा है कि तुम मेरी हर जिद्द पूरी नहीं करते,
अच्छा है कि मेरे हर सवाल को
अटका कर छोड़ देते हो तुम
मैं लौट कर खुद के पास आ जाती हूँ और
मेरी तन्हाई में मुझे मिल जाता है सब कुछ!
- सीmaa
Wednesday, July 19, 2017
मैं खुश रहना चाहती हूँ
मै ,
खुश रहना
चाहती हूँ
हर पल
इसलिए
मिलती हूँ
फूलों से ,
खेलती हूँ
हवाओँ से.
चहकती हूँ
पंछियों के साथ।
किसी गीत के
बोल गुनगुनाती हूँ ,
दीवानों के
मन मे डुबकी
लगाती हूँ
और
रंग देती हूँ
शब्दों को
इश्क़ के
रंग में !!
मै ,
हकीकत की
जमीन को
ठोकर मार के
थोड़ी दूर
ख़वाबों के
साथ उड़
जाती हूँ
बस इसलिए
कि मै
ख़ुश रहना
चाहती हूँ !!
- सीमा श्रीवास्तव
जो हुआ सो सही ही हुआ
नहीं पता कि जो हुआ
वो कितना सही हुआ
पर जो भी हुआ
वो होता चला गया!
ये नदियाँ जैसे बहती
चली गईं।
ये पौधे जैसे पेड़
होते गए!
कलियाँ जैसे करवट बदल कर
फूल बन गईं!
पत्थर घिस - घिस के
रेत होते रहे
और समन्दर सूख के
भाप से बादल!
हमारे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ
हाँ, जो हुआ सो सही ही हुआ!
- सीmaa
Sunday, July 16, 2017
संगीत
स्त्रियाँ अपने काजल से
रच लेती है आँखों में
कुछ रंगीन सपने,
हाथों की मेंहदी में
लिख लेती है
गजल और
गुनगुनाती है
जिंदगी की ताल पर
अपनी पसंद का कोई गीत!
अपने ख्वाबों में
झालर लगाकर वो रोज
उन्हें लहराती हैं
और छेड़ती हैं
मन के तारों पर
मधुर संगीत!
-सीmaa
साज़िश
तुम जब साजिशें रच रहे होगें
मैं तितलियों के पंखों के रंग गिन रही हूँगीं!
तुम जब पानी में ज़हर मिला रहे होगे
मैं नदी में अपने पैर डुबो कर
छप-छपाछप कर रही हूँगीं!
तुम जब दुनिया के सारे मासूम चेहरों को
मसलने की सोच रहे होगे
मैं अपनी कूचीं उठाकर बना रही हूँगीं
नींद से उठकर आँखें मलता एक बालक!
- सीmaa
Tuesday, July 4, 2017
पेड़
पेड़ के नीचे
बैठ कर देखना
ये उसकी मर्जी है कि
वो तुम्हें फूल देता है,
फल देता है या
सूखे पत्ते
और तुम कोई इच्छा
ना भी रखो तो
उसकी छाँव तले तो रहोगे ही!
- सीmaa