Saturday, May 23, 2015

    आशाएँ
**********************
कितनी बार डूबी हूँ ,

फिर खुद ही
सूरज की किरणों को पकड़
निकल आई हूँ बाहर !

मेरे मन का कोना ,कोना
आशाओ से है ओत - प्रोत !
फिर भी

अपने जिस्म पे उभर आये

जख्मो को देख जब घबड़ा जाती हूँ

मै हो जाती हूँ गुमशुदा ,
खो जाती हूँ , यादो के जंगल मे

और उलझते - उलझते
और भी जख्मी हो जाती हूँ !!

- सीमा

Friday, May 22, 2015

जीने के बहाने



हर लम्हा सुन्दर नहीं हो सकता ,

हर बात अच्छी नहीं हो सकती। 

हर शख्स नहीं मिल सकता  मन मुताबिक़ ,

हर गीत मधुर नहीं हो सकती। 

ना  हर फल होता है मीठा  ,
ना हर फूल होता है  खुशबूदार  

 हम हरदम तलाशते रहते हैं

अपने मन मुताबिक़ ठौर - ठिकाने !
जीने के नित नए- नए  बहाने !!

- सीमा 

Tuesday, April 21, 2015

पेड़



पेड़  यूँ ही एक दिन मे बड़े  नहीं होते  ,

वो रोज सोखते  हैं पानी ,

सैकतें हैं धूप ,

मिट्टी में गहराई तक उतरते रहते हैं

 थोड़ा -  थोड़ा रोज बढ़ते  रहते है ।

पेड़ यूँ ही एक दिन में  खड़े नहीं  होते ।
 किसी ने बहुत प्यार से इन्हे 
लगाया  होता है
यह सोचकर कि एक दिन ये पेड़ बनेगे ।

इन  पेड़ो को देख के
 कितना सुकून मिलता है ना !

ये हरे -भरे पेड़
 एक दिन में खड़े नहीं होते
पर  इन्हे  काटने  के लिए
  काफी होता है 
 एक दिन !
उफ़ !  लोग क्यों भूल जाते हैं

 कि पेड़ो  को  हम नहीं 

पेड़ हमें हरा - भरा रखते हैं !!

- सीमा 









Thursday, April 16, 2015

दर्द



जब चोट लगती है तो

चलता है पता ,

    दर्द       
    औरो के पास

कितना है !!

-  सीमा 

मौसम मस्ताना

   मौसम मस्ताना 
*********************
नवजीवन का संचार लिए ,
पत्ते-पत्ते में प्यार लिए
प्रकृति सज- धज के झूम रही
रंग -रूप पे नई निखार लिए ।
बागो में कोयल कूक रही ,
भँवरे फूलों पर फुदक रहे
मस्ती में चहक रही देखो
तितलियाँ रंगो की बहार लिए ।

हर फूल लग रहा दीवाना ,
कलियों का देखो अगड़ाना
सर - सर बहती ये पवन चली
मस्ती का संसार लिए |
- सीमा श्रीवास्तव

Tuesday, April 14, 2015

स्त्री की कामना



घर के गमलों में 
लगाना चाहती हूँ 
कुछ फूल
अपनी पसंद के ,

कुछ फूल जो
 हरदम रहें गुलजार । 

 रोज अपने
 रंग और खुशबू से 

देते रहें खुशियाँ अपार । 

जिससे महकता रहे 
मेरा घर - संसार । 

- - सीमा श्रीवास्तव 





Sunday, April 12, 2015

विघ्न विनाशक

विघ्नों से भला क्या घबराना 

इनका है काम आना और जाना । 

रख कर विश्वास चलते रहना तू 

नहीं कभी तू इनसे घबराना । 

देता है सीख रोज ये जीवन 

तेरा है काम सीखते जाना । 

पेड़ो ने क्या छोड़ा है जीना 
पत्तों का काम ही है झड़ जाना । 

बन के विध्न  विनाशक जो लहराए 

 सलाम करता है उसी को  ज़माना !!


-  सीमा श्रीवास्तव