उसने सतरंगी सपनों की चादर फैला दी थी उसकी छत पर ! एक दिन जोरों की बारिश हुई! रंग एक दूसरे में समा गए! चादर चितकबरी हो गई ! रंग टपक - टपक कर आँगन में बिखर गए! रंग एक दूसरे से घुल - मिल गए थे! यही रंग तो सच्चे थे ! सपनों के सतरंगी रंग तो बिल्कुल कच्चे थे!