Saturday, February 6, 2016

उसका दर्द

उसका दर्द
मेरे भीतर उतरता गया
अक्षर -अक्षर
घुटते रहे
शब्द सिसक- सिसक के
सो गए !!
- सीमा

होना ना होना

उसका ना होना
होने सा था
और उसका
होना
ना होने सा !

कभी -कभी
ना होना
ज्यादा मायने
रखता है
हो जाने से ।

संभावनाओं की
एक पूरी जमीन होती है तब
और ख्यालों का समूचा आसमान

और तब तक हो जाना
ना होने को
चुनौतियाँ देता है!
-सीमा 

शून्य


मैं शून्य की
ओर बढती जा
रही हूँ !
इस संख्या से 
भरी जिंदगी के भार को
बार-बार कंधों से उतारती
मैं थोड़ा सांस लेती हूँ
और थोड़ी देर शून्य हो
जाती हूँ !
उस शून्य में
हर बार मैं
पा लेती हूँ
जीवन का सार
कि बस
मुझे अब और
कुछ नहीं चाहिए!!
- सीमा

गोष्ठी


एक गोष्ठी
में बरती जाती है
थोड़ी शालीनता,
थोड़ा धैर्य,
लोगों को सुनने खातिर,
लोगों से कहने खातिर ।
यही लोग
यहाँ से निकलकर
अपने घर पहुंचते हैं
हाँ ,यहाँ इत्मीनान से
बैठ कर
की जा सकती हैं
कई तरह की बातें।
(तब तक लोग मन में दबा के रखते हैं बहुत कुछ)
- सीमा

Saturday, January 16, 2016

कुछ दिनों बाद
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कुछ दिनों बाद
चवन्नी की तरह
नकार दिया जाएगा
इश्क
रूपी  भ्रम को!

प्रेम वाले शब्दों को
समझा जाएगा प्रपंच !
दिल नहीं
स्वार्थों को
भिडाया जाएगा
आपस में!

ऐसा पहले भी
होता आया है
पर कुछ दिनों बाद
इश्क को एक
बीमारी समझ कर
इससे एहतियात बरती जाएंगी !

कुछ दिनों बाद बिना
मतलब के कोई भी
काम नहीं होगा!
- सीमा --

सतरंगी सपने

सतरंगी सपने 
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उसने सतरंगी सपनों की चादर
फैला दी थी उसकी छत पर !
एक दिन जोरों की बारिश हुई!
 रंग एक दूसरे में समा गए!
चादर चितकबरी हो गई !
 रंग टपक - टपक कर
आँगन में बिखर गए!
रंग एक दूसरे से
घुल - मिल गए थे!
यही रंग तो  सच्चे थे !
सपनों के सतरंगी रंग तो
बिल्कुल कच्चे थे!
- सीमा

उम्मीदों के दीए

उसने
उम्मीदों के 
सौ दीए 
जला रक्खे हैं 
तुम 

हवाओं को
जरा
थाम लेना !

- सीमा

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