Saturday, December 12, 2015

तेरी मर्जी

मुझे पता है
तुम्हारी मर्जी के बगैर
एक पत्ता भी नहीं हिलता !
और मै बेसब्र अपनी  हर
परेशानी में तुम्हे
झकझोर देती हूँ
कितने  सवाल कर जाती हूँ
 तुमसे !
- सीमा 


Friday, December 11, 2015

गुलाबी पंखुरियाँ


उसे कहा गया 
कि इसी जगह पर 
वह मिलेगा 
तुमसे !

 वह इंतज़ार 
करती रही !
आज उसी जगह पर 
सबने 
एक समाधि देखी   !

कुछ  दिनों बाद 
उसे भी 
देखा गया   !
वह आया था 
 दो बूँद आँसू 
और हथेली पर 
गुलाबी पंखुरियाँ लेकर !!

- सीमा 

Thursday, December 10, 2015

 ईशान कोण
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इस खानाबदोश जिंदगी में 

कितनी जगह स्थापित किया 
मैने अपना पूजा घर 
और हर तबादले पर 
 जगाती रही 
भगवान  को ,
आग्रह किया 
साथ चलने को । 
कितनी दिनों तक 
कूट के डब्बो में 
बंद रहे भगवान 
और मै व्याकुल होती रही । 

नए घर में फिर 
सजाती ईशान कोण 
पुनः विराजते  भगवान 
और मन को तसल्ली मिलती । 

अचानक ह्रदय  परिवर्तन हुआ !
 प्रभु ह्रदय में 
बसने लगे ! 
अब मै ईशान कोण  क्यूँ ढूँटती
ह्रदय से हटा कर 
उन्हें कहाँ  रखती !!

- सीमा




Wednesday, December 9, 2015

मुट्ठी

तुम्हारी तरफ

एक भी उगुँली उठे


यह तुम्हें बर्दाश्त नहीं था !


इसलिए मुट्ठियों भींच


रखी हैं मैंने!!



-  सीमा 

Saturday, November 7, 2015

लिबास

खुशियाँ हर  दिन  अलग ,अलग लिबास में आती हैँ । 

हीर


उसे हीर से 
बेपनाह मुहब्बत थी!
वह हर दिन मुझे उसी
नीले सिल्क के कुरते में 
नजर आता ।
साफ सुथरी ,
चमचमाती ।
पता चला
जुदा होने से पहले
हीर सौंप
गईं थी उसे
ये ( कुरता)
यादों की
अमानत !!
और
उसे एक पल भी
मंजूर ना था
उसकी यादों से
दूर रहना !!
- सीमा

पौधा



अपने आसपास 
तेजी से ऊँचाई की ओर बढ़ते 
पौधों को देख 
एक पौधा जरा सा
चबरा गया !
तब धरा ने उसे समझाया 
"इन जंगली पौधों की 
ऊँचाई पर मत जाओ
तुम अपने गुणों को देखो
तुम्हारी एक निश्चित रफ्तार है !
कि तुममें कितने  ही 

फूलों और फलों का संसार है!!"


- सीमा