अपने आसपास तेजी से ऊँचाई की ओर बढ़ते पौधों को देख एक पौधा जरा सा चबरा गया ! तब धरा ने उसे समझाया "इन जंगली पौधों की ऊँचाई पर मत जाओ तुम अपने गुणों को देखो तुम्हारी एक निश्चित रफ्तार है ! कि तुममें कितने ही फूलों और फलों का संसार है!!" - सीमा
नहीं मिल पा रही वो खुशी जितनी जिंदगी को जिए जाने के लिए चाहिए ।
बाहर से आने वाली कुछ चीखें घर के खाली बर्तनों में समा गई है!
दीवार की दरारों में घुस गईं हैं।
कि रक्त सबका एक सा ही होता है और मेरे रक्त ने मुझे भेदभाव करना नहीं सिखाया इसलिए हर बार किसी की चीख मुझे दर्द देजाती है और रोज ही कुछ घंटों का मौन रहता है मेरे साथ !!