Tuesday, July 7, 2015

चालीस के  दहलीज पर 


चालीस साला औरतो के अंदर  ही
जीती रहती है बीस साला लड़कियाँ
पहले से ज्यादा सुन्दर ,तेज और बहादुर
हो जाती हैं वो ,
क्यूंकि उनके साथ 
खड़ी रहती है
चालीस साला औरतें !!
- सीमा

Sunday, July 5, 2015

खुशियाँ

अपने हिस्से की
 कुछ खुशियाँ ,

बाँट डाली थी
कल जमाने में 
खिलखिला रहे हैं ,

सब  अपने घर में 
खुश  हूँ मै
 आज इसी 
बहाने से !!

- सीमा

Monday, June 29, 2015

उधार के शब्द


आज ले रही हूँ
तुमसे कुछ
उधार के शब्द
कि तुम्हारे
शब्दों में जादू है
और मुझे
चमत्कार की

जरूरत है!!
- सीमा 

बहाव


कितनी ही नदियों
का बहाव 

होता रहता है
अंदर ही अंदर !


सही दिशा के तलाश में 

ये भटकती रहती हैं !


कितनी बाधाओं को
ये करती

 रहती  है पार
निकलती है
इधर -उधर से
रहती है
बहने को तैयार
अड़चनों से
गुजरते ,गुजरते
नदियाँ नालो में
बदल जाती हैं !!
फिर भी ये
बहती रहती है.!

फिर भी ये
बहती रहती है.!!

-  सीमा 

Friday, June 26, 2015

इशारा



होता है कुछ इशारा
 उस रब का ही, 

कुछ बातें चाह के भी
 पूरी हो नहीं पातीं !

सपनो के शहर के  ,

कुछ सपने ही सच होते ,

हर सपने मे सच होने की

औकात नहीं होती !!

चाहत मन की 
मन  में दबी ही
 है रह जाती ,

किस्मत
 हर चाहत का

साथ नहीं देती !!

- सीमा 

Saturday, May 23, 2015

    आशाएँ
**********************
कितनी बार डूबी हूँ ,

फिर खुद ही
सूरज की किरणों को पकड़
निकल आई हूँ बाहर !

मेरे मन का कोना ,कोना
आशाओ से है ओत - प्रोत !
फिर भी

अपने जिस्म पे उभर आये

जख्मो को देख जब घबड़ा जाती हूँ

मै हो जाती हूँ गुमशुदा ,
खो जाती हूँ , यादो के जंगल मे

और उलझते - उलझते
और भी जख्मी हो जाती हूँ !!

- सीमा

Friday, May 22, 2015

जीने के बहाने



हर लम्हा सुन्दर नहीं हो सकता ,

हर बात अच्छी नहीं हो सकती। 

हर शख्स नहीं मिल सकता  मन मुताबिक़ ,

हर गीत मधुर नहीं हो सकती। 

ना  हर फल होता है मीठा  ,
ना हर फूल होता है  खुशबूदार  

 हम हरदम तलाशते रहते हैं

अपने मन मुताबिक़ ठौर - ठिकाने !
जीने के नित नए- नए  बहाने !!

- सीमा